रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों की मरम्मत और मूलभूत सुविधाओं के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता मामले में प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। दो कर्मचारियों के निलंबन के बाद अब मऊगंज में पदस्थ अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (ADM) पी.के. पांडे के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने उनका स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने के बाद कमिश्नर को कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा है।
Rewa Hostel Scam : जांच के बाद बढ़ी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, जिस अवधि में कथित अनियमितताएं हुईं, उस समय पी.के. पांडे आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में कुछ बिंदुओं पर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
प्रशासन का कहना है कि नोटिस के जवाब से संतुष्टि नहीं होने पर कलेक्टर ने कमिश्नर को पत्र भेजकर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की है।
Rewa Hostel Scam : क्या है पूरा मामला?
मामला रीवा जिले के लगभग 110 छात्रावासों के रखरखाव और मरम्मत कार्यों से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार छात्रावासों की मरम्मत, बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं के नाम पर सरकारी धन का उपयोग दर्शाया गया, जबकि कई स्थानों पर कार्य नहीं कराया गया। आरोप है कि बिना वास्तविक कार्य के ही राशि का आहरण कर लिया गया।
शिकायत मिलने के बाद गठित जांच समिति ने दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें कई अनियमितताओं की पुष्टि होने का दावा किया गया।
Rewa Hostel Scam : दो कर्मचारी पहले ही निलंबित
इस मामले में आदिम जाति कल्याण विभाग की स्टोर एवं निर्माण शाखा से जुड़े दो कर्मचारियों—विकास तिवारी और एक अन्य बाबू—को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब जांच की अगली कड़ी में तत्कालीन प्रभारी अधिकारी की भूमिका भी प्रशासनिक समीक्षा के दायरे में आ गई है।
Rewa Hostel Scam : दो से तीन करोड़ रुपये तक की अनियमितता का आरोप
प्राथमिक जांच में छात्रावासों के रखरखाव मद में लगभग 2.5 से 3 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई गई है। बताया जा रहा है कि शासन द्वारा प्रत्येक छात्रावास के रखरखाव के लिए निर्धारित राशि जारी की गई थी, लेकिन कई स्थानों पर कार्य कराए बिना ही भुगतान दिखाया गया।
Rewa Hostel Scam : दो वर्षों से लंबित था मामला
यह प्रकरण करीब दो वर्षों से लंबित बताया जा रहा है। शुरुआती जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई थी, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ निर्णय लंबित रहा। अब नए जिला प्रशासन ने पुराने मामलों की समीक्षा करते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
Rewa Hostel Scam : विधानसभा तक पहुंचा था मुद्दा
सूत्रों के अनुसार, इस कथित घोटाले का मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है। जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। अब कलेक्टर द्वारा कमिश्नर को भेजे गए प्रस्ताव के बाद आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। नोट: यह मामला फिलहाल प्रशासनिक जांच और अनुशासनात्मक प्रक्रिया के चरण में है। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच एवं नियमों के अनुसार लिया जाएगा।
