Corruption In India : सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने और प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लगातार प्रयासों के बावजूद भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई है। एक हालिया सर्वे में संपत्ति के रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर से जुड़ी प्रक्रिया में रिश्वतखोरी को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार, परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति अपने नाम कराने के दौरान 58 प्रतिशत परिवारों को रिश्वत देनी पड़ी।
यह सर्वे LocalCircles की ओर से किया गया है। रिपोर्ट में सामने आया कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के बावजूद जमीन और संपत्ति से जुड़े सरकारी कामों में लोगों को अब भी अनौपचारिक भुगतान का सामना करना पड़ रहा है।
Corruption In India : 58 फीसदी परिवारों ने रिश्वत देने की बात कही
सर्वे में शामिल परिवारों से संपत्ति ट्रांसफर की प्रक्रिया के दौरान रिश्वत से जुड़े अनुभवों के बारे में सवाल किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, 58 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि किसी परिजन की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति अपने नाम कराने के दौरान उन्हें रिश्वत देनी पड़ी।
रिपोर्ट के अनुसार, परेशानी केवल रिश्वत मांगने तक सीमित नहीं रही। कई लोगों ने बताया कि एक ही प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्हें अलग-अलग स्तरों पर भुगतान करना पड़ा।
Corruption In India : कई जगहों पर देना पड़ा पैसा
सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 29 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उन्हें संपत्ति ट्रांसफर से जुड़े काम के लिए एक या दो स्थानों पर रिश्वत देनी पड़ी। वहीं, अन्य 29 प्रतिशत परिवारों का कहना था कि प्रक्रिया के दौरान उन्हें कई जगहों पर रिश्वत का भुगतान करना पड़ा।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि समस्या किसी एक स्तर या एक कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
Corruption In India : प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन ऑफिस सबसे ज्यादा प्रभावित
सर्वे में शामिल लोगों के मुताबिक प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और लैंड ट्रांसफर से जुड़े कार्यालय रिश्वतखोरी की समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आते हैं। रिपोर्ट में 73 प्रतिशत लोगों ने इन्हीं कार्यालयों को रिश्वत दिए जाने के प्रमुख स्थान के तौर पर बताया।
वहीं, केवल 32 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि वे बिना किसी रिश्वत या बड़ी परेशानी के संपत्ति ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करा सके। इसके अलावा 11 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि उनके लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रही, क्योंकि संपत्ति के संबंध में पहले से वसीयत तैयार थी।
Corruption In India : 2022 के मुकाबले बढ़ा रिश्वतखोरी का आंकड़ा
LocalCircles के पुराने आंकड़ों से तुलना करें तो संपत्ति ट्रांसफर से जुड़े मामलों में रिश्वत देने वाले परिवारों का अनुपात बढ़ा है। वर्ष 2022 में हुए सर्वे में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत बताया गया था। अब 2026 की रिपोर्ट में यह बढ़कर 58 प्रतिशत हो गया है।
यानी चार साल की अवधि में ऐसे परिवारों की हिस्सेदारी में 6 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिन्होंने संपत्ति अपने नाम कराने के दौरान रिश्वत देने की बात कही।
Corruption In India : डिजिटल व्यवस्था के बावजूद क्यों नहीं रुक रहा भ्रष्टाचार?
सरकारी सेवाओं के डिजिटल होने का एक बड़ा उद्देश्य लोगों को दफ्तरों के चक्कर से बचाना और सरकारी कर्मचारियों से सीधे संपर्क को कम करना है। इससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होने की उम्मीद की जाती है। हालांकि, सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि जमीन और संपत्ति से जुड़े कामों में यह समस्या अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करना पर्याप्त नहीं है। जब तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह नहीं होगी, तब तक लोगों को अलग-अलग स्तरों पर अनावश्यक अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। संपत्ति ट्रांसफर जैसी जरूरी प्रक्रिया में रिश्वतखोरी का सामने आना इस बात की ओर इशारा करता है कि डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ निगरानी, जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत करने की जरूरत है।
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