India Corruption Report : नई दिल्ली, भ्रष्टाचार भारत में सिर्फ रिश्वत लेने-देने की कहानी नहीं है। यह सरकारी दफ्तर में किसी फाइल को आगे बढ़ाने से लेकर ठेके, जमीन, लाइसेंस, खरीद, भर्ती और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल तक कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतें और कार्रवाई लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन समस्या को केवल गिरफ्तारियों की संख्या से नहीं समझा जा सकता।
Transparency International के Corruption Perceptions Index (CPI) में भारत का स्कोर पिछले कुछ वर्षों में 40 के आसपास रहा है। 2021 और 2022 में भारत का स्कोर 40 रहा, 2023 में 39 और 2024 में 38 रहा। 2025 के CPI में भारत का स्कोर फिर 39 दर्ज हुआ और 182 देशों में भारत 91वें स्थान पर रहा। CPI सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा को मापता है, इसलिए इसे दर्ज हुए रिश्वत मामलों की सीधी गिनती नहीं माना जाना चाहिए।
India Corruption Report : पांच साल में शिकायतों की तस्वीर
भारत में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों का एक महत्वपूर्ण आंकड़ा लोकपाल से भी सामने आता है। केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2026 में लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक लोकपाल के पास 2021-22 में 149 शिकायतें दर्ज हुईं। 2022-23 में यह संख्या 320, 2023-24 में 166 और 2024-25 में 292 रही। 2025-26 में 28 फरवरी 2026 तक 389 शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। इसी अवधि में लोकपाल ने बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा भी किया।
हालांकि, लोकपाल के आंकड़ों को पूरे देश में होने वाले भ्रष्टाचार का पैमाना मानना उचित नहीं होगा। अलग-अलग राज्यों में लोकायुक्त, एंटी करप्शन ब्यूरो, पुलिस, CBI और अन्य एजेंसियां भी भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करती हैं।

India Corruption Report : सबसे नीचे से शुरू होती है आम आदमी की परेशानी
भ्रष्टाचार का सबसे प्रत्यक्ष रूप नागरिक और सरकारी कर्मचारी के बीच दिखाई देता है। प्रमाणपत्र, जमीन का रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, पुलिस कार्रवाई, स्थानीय निकाय की अनुमति, सरकारी भुगतान या किसी योजना का लाभ—ऐसे कामों में अगर अवैध रकम मांगी जाए तो आम नागरिक सीधे प्रभावित होता है।
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Transparency International के Global Corruption Barometer के भारत संबंधी उपलब्ध आंकड़े में 39 प्रतिशत सार्वजनिक सेवा उपयोगकर्ताओं ने पिछले 12 महीनों में रिश्वत देने की बात बताई थी। यह सर्वेक्षण पुराना है और इसे वर्तमान वर्ष का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन यह बताता है कि रोजमर्रा की सार्वजनिक सेवाओं में रिश्वत का अनुभव एक गंभीर मुद्दा रहा है।
India Corruption Report : बीच का स्तर: फाइल, प्रक्रिया और ‘कमीशन’
इसके ऊपर वह स्तर आता है जहां भ्रष्टाचार केवल सीधे पैसे लेने तक सीमित नहीं रहता। किसी ठेकेदार का बिल रोकना, भुगतान जारी करने के लिए प्रतिशत मांगना, काम का माप बदलना, टेंडर की प्रक्रिया को प्रभावित करना या किसी फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाना—ये ऐसे तरीके हैं जिनमें सरकारी प्रक्रिया का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया जा सकता है।
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2025 में महाराष्ट्र ACB के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट में राजस्व, भूमि रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन विभागों से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में अधिकारियों के रिश्वत लेते पकड़े जाने की जानकारी सामने आई। उसी रिपोर्ट में पुलिस और पंचायत समिति से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ भी बड़ी संख्या में ट्रैप कार्रवाई का उल्लेख था। यह आंकड़े पूरे भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करते, लेकिन यह दिखाते हैं कि नागरिक सेवाओं से जुड़े विभाग भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसियों की कार्रवाई के प्रमुख क्षेत्रों में रहते हैं।
India Corruption Report : ऊपर का स्तर: बड़ा पैसा, बड़े फैसले
भ्रष्टाचार का एक और स्तर सार्वजनिक खरीद, बड़े निर्माण कार्य, खनन, भूमि, लाइसेंस, ठेकों और सरकारी संसाधनों से जुड़ा हो सकता है। यहां रकम अपेक्षाकृत बड़ी हो सकती है और प्रक्रिया भी जटिल होती है। ऐसे मामलों में केवल किसी एक कर्मचारी को पकड़ना पर्याप्त नहीं होता। जांच में यह देखना पड़ता है कि निर्णय किस स्तर पर हुआ, किसे आर्थिक लाभ मिला, नियमों में क्या बदलाव हुए और सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ।
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यही कारण है कि भ्रष्टाचार की जांच में केवल रिश्वत की रकम बरामद होना अंतिम निष्कर्ष नहीं होता। दस्तावेज, बैंक लेनदेन, संपत्ति, ठेके, निर्णय प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण होती है।
India Corruption Report : ‘नीचे से ऊपर’ का नेटवर्क कैसे बनता है?
कई मामलों में भ्रष्टाचार की संरचना को एक सीढ़ी की तरह समझा जा सकता है—सबसे नीचे नागरिक सेवा से जुड़ी छोटी रिश्वत, उसके ऊपर बिचौलिया या सुविधा शुल्क, फिर विभागीय स्तर पर फाइल और भुगतान से जुड़े फैसले और बड़े स्तर पर ठेके या संसाधनों से जुड़े आर्थिक हित।
लेकिन हर मामले में ऐसा पूरा नेटवर्क मौजूद हो, यह मानना सही नहीं होगा। कई भ्रष्टाचार के मामले व्यक्तिगत स्तर पर होते हैं, जबकि कुछ मामलों में जांच एजेंसियां संगठित या बहु-स्तरीय आर्थिक लेनदेन की जांच करती हैं।
India Corruption Report : आंकड़े क्या कहते हैं?
सबसे अहम बात यह है कि भ्रष्टाचार का कोई एक ऐसा सरकारी आंकड़ा नहीं है जिससे कहा जा सके कि भारत में कुल कितने रुपये का भ्रष्टाचार हर साल होता है। CPI धारणा आधारित सूचकांक है, लोकपाल के आंकड़े उसकी शिकायतों तक सीमित हैं और ACB/CBI जैसी एजेंसियों के ट्रैप केवल पकड़े गए मामलों को दिखाते हैं।
इसलिए असली चुनौती सिर्फ भ्रष्ट अधिकारी को पकड़ना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें रिश्वत मांगने की गुंजाइश कम हो। डिजिटल सेवाएं, पारदर्शी टेंडर, ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध सेवा, मजबूत ऑडिट, शिकायतकर्ता की सुरक्षा और स्वतंत्र जांच व्यवस्था भ्रष्टाचार के अवसरों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आखिर भ्रष्टाचार की लड़ाई केवल ‘किसे पकड़ा गया’ तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली सवाल यह है कि वह व्यवस्था कैसे बदले, जिसमें आम नागरिक को अपना वैध काम कराने के लिए किसी व्यक्ति, बिचौलिए या ‘कमीशन’ पर निर्भर न रहना पड़े।
नोट: ये आर्टिकल खबरों के आधार पर लिखा गया है, तस्वीर इससे भी भयानक है।
