MP Govt School Teachers : भोपाल, एक तरफ जहां देश डिजिटल क्रांति और 5G तकनीक के नए आयाम छू रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों से आई एक तस्वीर डिजिटल इंडिया के दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच के अंतर को साफ बयां करती है। राज्य के सुदूर ग्रामीण अंचलों में तैनात सरकारी शिक्षकों के लिए रोज सुबह अपनी डिजिटल हाजिरी दर्ज कराना किसी खेल प्रतियोगिता या साहसिक अभियान से कम नहीं है। मोबाइल नेटवर्क का सिग्नल पाने के लिए इन शिक्षकों को कभी स्कूल की ऊंची छतों पर दौड़ लगानी पड़ती है, तो कभी पेड़ों की डालियों पर जान जोखिम में डालकर चढ़ना पड़ता है।
MP Govt School Teachers : ‘हमारे शिक्षक’ ऐप और शिक्षकों की मजबूरी
मध्य प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘हमारे शिक्षक’ (Hamare Shikshak) नामक एक मोबाइल ऐप की शुरुआत की है। इस व्यवस्था के तहत सभी शिक्षकों को रोजाना स्कूल पहुंचते ही ऐप के जरिए अपनी ‘ई-अटेंडेंस’ (e-attendance) दर्ज करानी होती है।

विचार भले ही आधुनिक और पारदर्शी हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमी ने इसे शिक्षकों के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का जरिया बना दिया है। राज्य के आगर-मालवा, छतरपुर और अन्य दूरस्थ जिलों से लगातार ऐसे वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिनमें शिक्षक हाथों में स्मार्टफोन लिए पेड़ की शाखाओं पर लटके हुए हैं या जलती धूप में छत की मुंडेर पर खड़े होकर मोबाइल सिग्नल की एक-एक बार (signal bar) तलाश रहे हैं।
MP Govt School Teachers : सोशल मीडिया पर वायरल और ग्रामीणों की चिंता
हाल ही में आगर-मालवा जिले के बारोद ब्लॉक से एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, जिसमें एक गणित के शिक्षक पेड़ पर चढ़कर मिड-एयर (हवा में) अपनी अटेंडेंस मार्क करते दिख रहे हैं। नेटिजन्स ने इस पर व्यंग्य करते हुए लिखा कि “शिक्षक शायद सिग्नल जाने से पहले गणित का ‘x’ हल कर रहे हैं।”
यद्यपि ये वीडियो लोगों के लिए मनोरंजन या हंसी का कारण बन रहे हैं, लेकिन यह स्थिति शिक्षकों के लिए बेहद दर्दनाक है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, अब उनकी सुबह की शुरुआत शिक्षकों को छतों और पेड़ों पर ‘सिग्नल खोजते’ देखकर होती है। छतरपुर के एक प्राथमिक शिक्षक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे डेली लेसन प्लान में ‘छत की चेकिंग’ भी शामिल होगी। हम वहां से नजारा देखने नहीं जाते, बल्कि अपनी रोजी-रोटी और सैलरी बचाने के लिए जाते हैं।”
MP Govt School Teachers : वेतन कटने और कार्रवाई का डर
शिक्षकों के इस जोखिम उठाने के पीछे का सबसे बड़ा कारण प्रशासनिक कार्रवाई और वेतन में देरी का डर है। अगर तय समय सीमा (time window) के भीतर ऐप पर अटेंडेंस दर्ज नहीं होती है, तो शिक्षक को अनुपस्थित मान लिया जाता है, जिससे उनकी उस दिन की सैलरी कट सकती है या उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया जाता है। इसी डर के कारण शिक्षक अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना पेड़ों पर चढ़ने को मजबूर हैं।
MP Govt School Teachers : शिक्षा विभाग का तर्क बनाम शिक्षक संघ की मांग
इस पूरे विवाद पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल उपस्थिति का उद्देश्य फर्जी हाजिरी (ghost-staffing) को रोकना और तंत्र में सुधार लाना है। सर्वर की समस्याओं और तकनीकी खराबी से निपटने के लिए ऐप में ‘ग्रेस टाइम’ और ‘कैप्चा चेक’ जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं।
दूसरी ओर, शिक्षक संघ के सचिव उपेन्द्र कौशल का कहना है कि शिक्षक ई-अटेंडेंस या डिजिटलाइजेशन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे व्यवस्थागत कमियों का विरोध कर रहे हैं। संघ की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
ऑफलाइन अटेंडेंस का विकल्प: जहां नेटवर्क नहीं है, वहां ऐप में ऑफलाइन डाटा सेव करने और नेटवर्क आने पर सिंक होने की सुविधा दी जाए।
सिग्नल बूस्टर का इंतजाम: दूरदराज के ग्रामीण स्कूलों में साधारण नेटवर्क बूस्टर या वाई-फाई डिवाइस लगाए जाएं।
ऑन-साइट भौतिक सत्यापन: केवल डिजिटल माध्यम पर निर्भर रहने के बजाय भौतिक रूप से निरीक्षण की व्यवस्था हो।
MP Govt School Teachers : डिजिटल महत्वाकांक्षा और ग्रामीण वास्तविकता
तकनीक का उद्देश्य मानव जीवन और कार्यप्रणाली को सुगम बनाना होता है, न कि उसे और जटिल बनाना। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ‘डिजिटल रीच’ (डिजिटल पहुंच) और ‘रूरल रियलिटी’ (ग्रामीण वास्तविकता) के बीच का यह सीधा टकराव नीति निर्माताओं के लिए एक सबक है।
जब तक दूरदराज के क्षेत्रों में निर्बाध मोबाइल नेटवर्क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक इस तरह के डिजिटल नियम शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय ‘अक्रोबैट’ (नट) बनने पर मजबूर करते रहेंगे। सरकार को चाहिए कि वह कड़े नियमों को थोपने के बजाय जमीनी समस्याओं को समझे और व्यावहारिक समाधान निकाले।
