MP Bribery Case : झाबुआ, मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में रिश्वतखोरी के मामले में इंदौर लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई की है। निलंबन अवधि के आठ महीने के वेतन का बिल पास कराने के बदले ₹10 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी पवन सिंह बिलवाल को रंगेहाथ पकड़ा गया। इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी जय नारायण बैरागी के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि करीब ₹2.30 लाख का बकाया वेतन जारी कराने के लिए उससे रिश्वत मांगी जा रही थी। लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद ट्रैप की कार्रवाई की।
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MP Bribery Case : आठ महीने का वेतन निकालने के लिए मांगी रिश्वत
लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता धूम सिंह सिंगाड़ झाबुआ जिले के सेमलिया बड़ी स्थित शासकीय बालक छात्रावास में अधीक्षक हैं। उन्होंने इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि निलंबन अवधि के आठ महीने के वेतन के रूप में मिलने वाले करीब ₹2 लाख 30 हजार का बिल पास कराने के लिए उनसे ₹10 हजार मांगे जा रहे हैं।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के निर्देश पर मामले का सत्यापन कराया गया। शिकायत सही पाए जाने के बाद 22 अक्टूबर 2026 को कार्रवाई की योजना बनाई गई।

MP Bribery Case : विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ट्रैप
लोकायुक्त की टीम ने झाबुआ स्थित विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी पवन सिंह बिलवाल को शिकायतकर्ता से ₹10 हजार लेते हुए पकड़ा गया।
लोकायुक्त के मुताबिक, विकासखंड शिक्षा अधिकारी जय नारायण बैरागी की भूमिका भी मामले में सामने आई है। आरोप है कि रिश्वत की रकम उनके कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी के माध्यम से ली गई। दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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MP Bribery Case : दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज
लोकायुक्त पुलिस ने जय नारायण बैरागी और पवन सिंह बिलवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम, 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
यह कार्रवाई लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई। ट्रैप टीम में निरीक्षक आशुतोष मिठास के साथ प्रधान आरक्षक विजय और विवेक मिश्रा तथा आरक्षक आदित्य भदौरिया, कमलेश और पवन पटोरिया शामिल थे।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई में बकाया वेतन जारी कराने के बदले कथित रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। मामले में दर्ज आरोपों पर आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
