MP PWD CEMENT FREE ROAD : भोपाल। मध्यप्रदेश में सड़क निर्माण को आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश में भविष्य की सड़क परियोजनाओं में ऐसी आधुनिक निर्माण तकनीकों को शामिल करने की तैयारी है, जिनमें सीमेंट की आवश्यकता कम या समाप्त हो सकती है। इसी क्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बुधवार को भोपाल स्थित CSIR-AMPRI का भ्रमण किया और संस्थान में विकसित विभिन्न आधुनिक निर्माण तकनीकों की जानकारी ली।

मंत्री राकेश सिंह ने विभागीय अधिकारियों के साथ संस्थान की प्रयोगशालाओं और प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क, पुल और भवन निर्माण में इस्तेमाल की जा सकने वाली नई एवं पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों की तकनीकी विशेषताओं को समझा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी तकनीकों की व्यवहारिक उपयोगिता का परीक्षण कर उन्हें जरूरत के अनुसार PWD की परियोजनाओं में शामिल किया जाए।

MP PWD CEMENT FREE ROAD

MP PWD CEMENT FREE ROAD : जिओपॉलीमर कंक्रीट पर विशेष जोर

भ्रमण के दौरान जिओपॉलीमर कंक्रीट की तकनीक मंत्री के विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस तकनीक में पारंपरिक सीमेंट आधारित कंक्रीट के स्थान पर वैकल्पिक बाइंडर का उपयोग किया जाता है। इसके माध्यम से औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य उपलब्ध संसाधनों का उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा सकता है।

मंत्री को बताया गया कि जिओपॉलीमर कंक्रीट से तैयार सड़क के लिए सामान्य कंक्रीट की तरह पानी से तराई करने की आवश्यकता नहीं होती। इससे निर्माण प्रक्रिया में पानी की खपत कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, कम मोटाई में भी एम-40 स्तर के अनुरूप मजबूती प्राप्त की जा सकती है।

इस तकनीक का एम्स भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस्तेमाल भी किया जा चुका है। मंत्री राकेश सिंह ने इसे मध्यप्रदेश की सड़क परियोजनाओं के लिए उपयोगी तकनीक बताते हुए इसके व्यापक परीक्षण और संभावित इस्तेमाल पर जोर दिया।

MP PWD CEMENT FREE ROAD : औद्योगिक कचरे से बनेंगी निर्माण सामग्री

CSIR-AMPRI के अधिकारियों ने मंत्री को फ्लाई ऐश और रेड मड समेत औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्ट से तैयार की जा रही निर्माण सामग्रियों के बारे में जानकारी दी। इनमें पेवर ब्लॉक, कर्ब स्टोन और ड्रेनेज ब्लॉक जैसे प्रीकास्ट उत्पाद भी शामिल हैं।

अधिकारियों के मुताबिक संस्थान द्वारा करीब 16 वर्ष पहले लगाए गए पेवर ब्लॉक आज भी मजबूत स्थिति में हैं। इन पर काई नहीं जमने की जानकारी भी दी गई। इससे इन सामग्रियों की लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता का पता चलता है।

MP PWD CEMENT FREE ROAD : बांस और कृषि अवशेषों से नई तकनीक

मंत्री ने संस्थान में विकसित अन्य तकनीकों का भी अवलोकन किया। इनमें बैम्बू कंपोजिट, हाइब्रिड वुड, रेड मड आधारित रेडिएशन शील्डिंग टाइल्स, एंटी-कोरोसिव और फायर-रेसिस्टेंट कोटिंग्स तथा कृषि अवशेषों से तैयार किए जाने वाले ग्रीन बाइंडर्स शामिल हैं।

इन तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं को लेकर मंत्री ने अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ चर्चा की। उनका जोर ऐसी निर्माण सामग्री पर रहा, जो मजबूत होने के साथ पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर हो।

MP PWD CEMENT FREE ROAD : CSIR-AMPRI बनेगा PWD का तकनीकी साझेदार

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण, मजबूत और टिकाऊ अधोसंरचना के निर्माण को प्राथमिकता दे रही है। इसी उद्देश्य से CSIR-AMPRI में विकसित तकनीकों का PWD की परियोजनाओं में व्यापक इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि आगामी इंजीनियर्स डे के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में CSIR-AMPRI के साथ एमओयू किए जाने की योजना है। इस समझौते के बाद संस्थान को PWD के तकनीकी साझेदार के रूप में जोड़ा जा सकता है।

एमओयू के माध्यम से आधुनिक निर्माण तकनीक, नई निर्माण सामग्री, गुणवत्ता परीक्षण और तकनीकी परामर्श जैसे क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया जाएगा।

MP PWD CEMENT FREE ROAD : पायलट प्रोजेक्ट के बाद होगा विस्तार

मंत्री ने अधिकारियों को CSIR-AMPRI के वैज्ञानिकों के साथ समन्वय कर विभिन्न तकनीकों का तकनीकी परीक्षण करने के निर्देश दिए। इसके बाद उपयुक्त तकनीकों को पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर PWD की परियोजनाओं में लागू करने की योजना है।

मंत्री ने कहा कि जिओपॉलीमर कंक्रीट जैसी तकनीकों से निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन बढ़ाने के साथ पानी की बचत तथा औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग को भी बढ़ावा मिल सकता है। इससे अधोसंरचना विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस दौरान PWD के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह, सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक सी.बी. चक्रवर्ती, प्रमुख अभियंता और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। CSIR-AMPRI की ओर से अपर निदेशक, वरिष्ठ वैज्ञानिक मनीष मुद्गल, वैज्ञानिकों और अन्य अधिकारियों ने नई तकनीकों की जानकारी दी।

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